जब तुम्हें आत्मज्ञान प्राप्त होता है, तो यह अनुभूति होती है कि तुम्हारा जन्म और कर्म दोनों दिव्य हैं।
एक भी अपशब्द तुम्हारे मुख से नहीं निकलता | किसी के प्रति कोई दुर्भावना नहीं होती।
ऐसा हो ही नहीं सकता क्योंकि सभी अपने लगते हैं ।यह प्रेम की पराकाष्ठा है ।
- गुरुदेव श्री श्री ||
When you attain Self-knowledge, you feel that both your birth and your deeds are divine.
Not a single abusive word comes out of your mouth. There is no ill-will towards anyone. It’s impossible because everyone seems to be your own. This is the culmination of love.
- Gurudev Sri Sri ..
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